खुशी जल्दी मै थी रुकी नहीं गम फुरसत में थे ठहर गए लोगों की नजरों में फर्क अब भी नही है पहले मुड़कर देखते थे अब देखकर मुड़ जाते हैं परछाई से पूछ लिया क्यों चलती हो मेरे साथ उसने हंसकर कहा और कौन है तेरे साथ 🙏🙏🙏
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Showing posts from March, 2023
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🙏🙏🙏 प्यास लगी गजब की लेकिन पानी मे जहर था पीते तो मर जाते न पीते तो भी मर जाते बस यही जिंदगी भर के मसले हल न हुए न नीद पूरी हुई न ख्वाब मुकमल हुए वक्त ने कहा काश थोड़ा और सब्र होता सब्र ने कहा काश थोड़ा वक्त और होता हुनर सड़कों पर तमाशा करता है और किस्मत महलों में राज करती है सुबह सुबह उठना पड़ता है जिंदगी कमाने के लिए आराम कमाने निकलते है आराम छोड़कर दौलत की भूख ऐसी लगी की कमाने निकल गए दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए बच्चो में रहने की फुरसत न मिली जब फुरसत मिली तो बच्चे खुद कमाने निकल गए
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एक सच्चाई खुशी में साथ देने वाले तो बहुत होते है लेकिन कदर हमेशा उनकी करो जो गम में भी साथ दे किसी को मौका मत दो की वो आप पर धौंस जमाए अपनी जिंदगी अपने तरीके से जिए किसी को प्यार,इज्जत,साथ देना बहुत अच्छी बात है लेकिन किसी से उम्मीद करना सही नहीं है जितनी कम उम्मीदें होगी उतने ही ज्यादा खुश रहोगे 😊😊😊
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थोड़ा रो लिया.....थोड़ा मुस्कुरा भी लिया है ..... मगर जिंदगी किस मोड़ पर ले जायेगी वो नही पता..... मुसीबतें है सर पर .... कुछ स्वालों के जवाब मिल ही नहीं रहे .... कुछ अधूरा सा है ...कुछ पूरा भी हो गया ....... फिर भी जिंदगी अधूरी सी लगती है .... सब छोड़ दिया मैंने वक्त पर ....... माना आज वक्त बुरा है मगर कल का वक्त अच्छा भी तो आयेगा... जिंदगी बाकी है ....................
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,,,,,,,True word,,,,,,, हम हिंसा का विरोध करते है क्योंकि उससे पाया हुआ समाधान बहुत कम वक्त के लिए होता है उससे पैदा हुई नफरत हमेशा रहती है दुर्रबल लोग कभी क्षमा नही कर सकते क्षमा करना तो बलबानो का गुण है अपनेआप को खोजने का सबसे अच्छा तरीका है अपनेआप को दूसरों की सेवा में खो देना मैं मरने को तयार हू लेकिन ऐसी कोई वजह नहीं है जिसके लिए मैं मारने को तयार हूं व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित प्राणी है वो जो सोचता है वही बन जाता है
Zindhgi ka safar
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मत पूछो इस जिंदगी में कैसा कैसा मंजर देखा है गैरों के हाथों में मरहम अपनों के हाथ में खंजर देखा है मुर्दो के पीछे चलती भीड़ को भी हंसते देखा है दिल की बंद डिब्बियो मे कई राज छुपाए बैठे है अपने ही अपनों से अपना स्वार्थ लगाए बैठे है न जाने कैसी कैसी शिकायतों का शिकार होते देखा है बिना जुर्म किए खुद को गुनाहकार होते देखा है