दुनिया को हमसे तरह तरह की अपेक्षाएं है
समाज चाहता है उसके मुताबिक चले
रिश्तेदार चाहते है हम उनका कहा सुने
मां बाप चाहते है हम कुछ और बने
हमारा पार्टनर चाहता है हम उसके हिसाब से रहे
सच तो ये है की हम कोशिश भी करते है
सबको खुश रखने की
पर एक दिन इन सबका मन रखते रखते हम मे हमारा कुछ नही बचता
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