मेरे जीवन का लक्ष्य
मैंने अपने जीवन का छोटा सा लक्ष्य माना है
जप भूल चुके हो अपनी राह
उन्हें रास्ता दिखाना है
दुःख की राह हो चाहे लम्बी
मगर सवेरा भी तो आना है
दुःख बाटने को तो आये है हम
उम्र काटना तो इक बहाना है
बुराई को जड़ से मिटाना है
सच्चाई को ही अपनाना है
बेदभाव और बढ़ले की भवना न हो
सभी को एकता के ज्ञान से अवगत करवाना है
अंधकार में न रहे कोई
सबके जीवन में दीपक जलना है
बंचित न रहे कोई
हरेक को रास्ता दिखाना है
तंग आ गए है जो आदमी जीने से
उन्हें जीने का ढंग सीखना है
नफरत है जिनके दिल में बसी
वंहा प्यार का दीपक जलना है
कुश रहे सब खुशिया हो नसीब सब को
यह दूनी चंद विद्याराम कौशल का सपना है
बस इतना सा ही मैंने अपने जीवन का लक्ष्य मना है
Nice
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